बस गए मेरी निग़ाहों में

तुम जो मिले हो राहों में,बस गए मेरी निगाहों में।
आओ सनम हम खो जाएँ,प्यार की महकी फ़िज़ाओं में।।

रुत ये सुहानी सावन की,आज मस्ती से भरा मन है।
तुम संग हो तो जीवन में,रंग भरता साथ गुलशन है।
हम फूल-ख़ुशबू-से मिलके,मीत हों सजती सदाओं में।।
आओ सनम हम खो जाएँ,प्यार की महकी फ़िज़ाओं में।।

रातें हसीं दिन मस्ताने,हम बने हैं यार दीवाने।
तेरी हँसी तेरे नज़राने,कम नहीं ये नाज़ अफ़साने।
तुम मौज़ हो मैं हूँ साहिल,यूँ मिले हैं बहकी अदाओं में।।
आओ सनम हम खो जाएँ,प्यार की महकी फ़िज़ाओं में।।

रब की इबादत मोहब्बत,नूर ज़न्नत का इसे कहना।
साथी दुवा रब से मेरी,जन्म सातों साथ ही रहना।
दिल आइना तेरी सूरत,है बसी हँसके पनाहों में।।
आओ सनम हम खो जाएँ,प्यार की महकी फ़िज़ाओं में।।

तुम जो मिले हो राहों में,बस गए मेरी निगाहों में।
आओ सनम हम खो जाएँ,प्यार की महकी फ़िज़ाओं में।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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