गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

जो करो तुम बस करो जी जान से

आपकी झोली भरेगी ज्ञान से.
यदि करोगे मित्रता विद्वान से.

हाथ फैलाना नहीं अपने कभी
हाथ ऊपर रख जियो बस शान से

है सुरक्षित देश का हर नागरिक,
सैनिकों के त्याग से बलिदान से

माफ़ करना ही लगा अच्छा हमें,
कब तलक करते गिला नादान से

लुट रहा था बीच चौराहे पर कोई,
लोग बस बैठे रहे अनजान से

नाम पर जिसके मिला, दुबला रहा,
और मोटे वो हुए अनुदान से

हर सफलता कोशिशों में है छुपी,
बस करो जो भी करो जी जान से

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Author
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन
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