कविता · Reading time: 1 minute

बस एक किरदार हो

तुम समझते हो के तुम समझदार हो,
अरे तुम तो बस एक किरदार हो।
भागते हो जैसे वो भगाता है,
नाचते हो जैसे वो नचाता है,
जरा सी कुर्सी पाकर खुद को समझते राजदार हो,
अरे तुम तो बस एक किरदार हो।
वो चाहता है तो चलती हैं सांसे तुम्हारी,
वो चाहता है तो खिलती हैं बांछे तुम्हारी,
तुम क्या दोगे उसे, जिसने तुम्हे सब दिया,
क्या करोगे उसकी रक्षा जिसने तुम्हे पैदा किया,
जरा सी इज्जत पाकर खुद को समझते बड़े इज्जतदार हो,
अरे तुम तो बस एक किरदार हो।

© बदनाम बनारसी

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