बाल कविता · Reading time: 1 minute

” बस्ता “

माँ मुझे भी स्कूल जाना है
लेकर एक प्यारा सा बस्ता
भले हो वह सस्ता
बस उसमें तेरा प्यार भरा हो
सारे जहाँ का ज्ञान धरा हो
ज्ञान ले कर हम प्यार बाँटें
ना की एक दूसरे को काटें
वैसे तो यहाँ ज्ञानी सभी हैं
फिर भी इनमें ज्ञान की कमी है
जाने कैसा ज्ञान लिया है
प्यार के बदले नफ़रत दिया है
मेरा बस्ता भले हो सस्ता
माँ इतना सा ध्यान रखना
मेरे बस्ते में तुम बस
शुद्ध व सच्चा ज्ञान धरना
उस ज्ञान से हम बने विद्वान
रखें ज्ञान का हमेशा मान ।

स्वरचित एवं मौलिक
( ममता सिंह देवा , 14/06/2021)

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" लेखन से अपने मन को संतुष्ट और लेखनी को मजबूत करती हूँ " मैं भारत से Pottery & Ceramic विषय से Masters ( BHU 1993 ) करने वाली पहली…
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