Feb 1, 2017 · कविता
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बसंतोत्सव

???बसंतोत्सव???

“बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं”
??????
आया है बसंत फिर से
आओ प्रिय कुछ प्रीत बुनें
जीवन की आपाधापी छोड़
फिर दिल के कुछ गीत बुनें

खिलते फूलों से पूछें कुछ
झरते पत्तो से सीखें कुछ
पंछियों से उड़ना सीखें
भूल जाएंजीवनके गम कुछ

सरसों फूली पीली-पीली
फूलों ने अजब रंग पाए
हरी धरा ने चादर ओढ़ी
सुगंध चहुँदिश छाए

कलियों जैसे खिल जाएं हम
फूलों से चलो नहाएं
धरती जैसे बन जाएं हम
महक बन फैल जाएं
??????

इला सिंह
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ila singh
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अंतर में बहती नदी पन्नों पर बहना चाहती है ... ...............इला सिंह ..........रायपुर View full profile
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