Apr 14, 2018 · मुक्तक
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बलात्कार बाकी है

वो जो जंगलों में रौंदी गई
है सबकी निगाह मे अब
उससे यही सवाल कि
वो घर से बाहर क्यों गई
हां मगर मेरा भी एक सवाल है
जहां से नहीं खुद से
कि वो जो …
घर की चाहर दीवारी मे
मसली गई ,रौंदी गई ,
कतरा कतरा काटी गई
रिश्तेदारों में बांटी गई
मुंह भींचकर नोची गई
बांधकर जिस्म ओ जां
खरोंची गई
तार तार रूह की वो
अस्मिता होती गई
वो दर्द मे धुलती गई
सूखी आंख रोती गई
उसको ये गम है कि वो
घर से बाहर क्यों नहीं गई
वो अब भी कैद है
क्योकि हिम्मत नहीं उसमे
बाहर आने की
और बार बार लुटने की
अरे अब वो जो लुट चुकी है
उसे और कितना लूटोगे
लाईट कैमरा एक्शन जारी है
मतलब अभी उसका और
बलात्कार बाकी है ……
प्रियंका मिश्रा _प्रिया

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Priyanka Mishra Priy@Dd
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