Jun 9, 2021 · मुक्तक
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“बरसाती बारात”….

मुश्किल यहां, टिकने की बात है।
यहां तो , कवियों की बारात है।
अरे , नाच रहे है सब यहां , ऐसे ;
जैसे, बैसाख में हुई बरसात है।

स्वरचित सह मौलिक
पंकज कर्ण
कटिहार

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पंकज
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"शिक्षक"... MA. (Hindi, Psychology & Education) B.Ed , LL.B (BHU), View full profile
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