May 16, 2021 · गीत
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बरसती बरसात में ______ गीत

पैरोडी गीत __ तर्ज–ओ फिरकी वाली तू कल फिर आना—

*****पाठक बंधु इसी तर्ज से यह गीत पढ़ें ।****
चली चली ओ चली पुरवाई,
घटाएं भी है छाई।
बरसती बरसात में,
भीगे तन और मन दोनों साथ में।।
चली चली————-
(१) नाचे मयूरा और कोयल भी कूंके,
टर टर टर दादुर बोले।
बरसे है रिमझिम ऐसे हैं बरसे,
मनवा सबका ही डोले।।
ताल तलैया___ताल तलैया भर गए सारे,
फूटे झरनों के फव्वारे।
दिन हो रात या फिर हो प्रभात में,
भीगे तन और मन दोनों साथ में।।
चली चली _______________
सावन में सजनी के सजना भी आए,
झूले डाले बागन में।
गगरी उठा के कोई कजरी सुनाए,
झूम रहा कोई आंगन में।।
सबसे प्यारी _____सबसे प्यारी, बरखा न्यारी
खिल गई धरती की फुलवारी।
हलधर चला हल लेकर हाथ में,भीगे तन और मन दोनों साथ में।
चली चली__________________
राजेश व्यास अनुनय

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Rajesh vyas
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रग रग में मानवता बहती। हरदम मुझसे कहती रहती। दे जाऊं कुछ और ,जमाने तुझको,... View full profile
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