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बन विवेक-आनंद,कह रहा संवत्सर नव

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

March 29, 2017

नव संवत्सर पर बनो, आप ज्ञानमय प्राण|
तब ही राष्ट्र प्रसन्न जब, सब का हो कल्याण||
सबका हो कल्याण, जाग,कुछ पाना सीखो|
तजकर मन का मैल, मुस्कराना भी सीखो||
कह “नायक” कविराय,कुछ नहीं दिखे असंभव|
बन विवेक-आनंद, कह रहा संवत्सर नव||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

प्राण=जीवन,शक्ति

आपको भारतीय नव वर्ष,विक्रम संवत 2074 एवं नव रात्रि की अनंत हार्दिक शुभकामनाएं |

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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