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बना कुंच से कोंच,रेल-पथ विश्रामालय||

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

June 3, 2017

विश्रामालय रेल का कुंच पड़ गया नाम|
गोरों-शासन बाद तक ऋषि को किया प्रणाम||
ऋषि को किया प्रणाम कुंच स्टेशन भाया|
संशोधित पुनि नाम कुंच से कोंच बनाया||
कह नायक कविराय कोंच अब भी देवालय |
बना कुंच से कोंच रेल-पथ विश्रामालय ||
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बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
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ऋषिवर कौंच सुनाम पर, प्रजा कहे श्री कुंच |
चहुँ दिश बोध-विमान-द्विज, ना कोई भी टुंच ||

उक्त पंक्तियां “क्रौच सुऋषि आलोक” कृति की पंक्तियां हैं जो यह सिद्ध करती है कि आम आदमी ‘क्रौंच ऋषि’ को ” कुंच ” नाम से भी जानता,पहचाना एवं पुकारता था|
बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
03-06-2017

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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