कविता · Reading time: 1 minute

***बधाई बधाई नवजीवन को बधाई***

गूंज रहे हैं चारों ओर ही, ढोल नगाड़े शहनाई ।
शादियों का मौसम आया, बाजारों में रौनक छाई
कोई बना है दूल्हा राजा, किसी अंगना बारात है आई।
बधाई बधाई ,नवजीवन को बधाई।।
कोई नाच रहा ,कोई झूम रहा, सारे कामों में व्यस्त है।
भारतीय परंपरा का दृश्य देखो , लगता कितना मस्त है।
आनंद उत्सव की यह घड़ियां ,सबके मन को है भाई।
बधाई बधाई नवजीवन को बधाई ।।
आना जाना खाना पीना गली-गली में लगा हुआ है।
लगता ऐसा देश मेरा तो रात रात भर जगा हुआ है।
संस्कृति की परंपराएं, सब ने मिलकर खूब निभाई।
बधाई बधाई नवजीवन को बधाई ।।
अनुनय वैवाहिक बंधन, जन्म जन्म का साथ रहे।
दांपत्य जीवन में बधने वालों पर ,ईश्वर का हमेशा हाथ रहे।
मांग रहा है दिल तो हमारा सब के लिए दुहाई।
बधाई बधाई नवजीवन को बधाई ।।
राजेश व्यास अनुनय

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