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बदल रहा है मेरा गाँव

॥बदल रहा है मेरा गाँव॥
नहीँ रही पनघट पर गोरी
नहीँ रही पीपल की छाँव
बदल रहा है मेरा गाँव ॥
रिश्ते नाते टूट रहे है ,
संबोधन सब छूट रहे है ,
कोई ना किसी के पड़ता पाँव ,
बदल रहा है………….
बऊ दद्दा की वो आशीशे
अम्मा के आँचल की छाँव
नहीँ मिले अब कही भी जाव ,
बदल रहा है…………….

हर कोई बस भाग रहा है ,
धन के पीछे भाग रहा है ,
धन न रुके कभी एकइ ठाव ,
बदल रहा है…………..
धन तो सबने कमा लिया है
दीप खुशी का बुझा लिया है
हर खुशी हुई अब हारा दाँव
बदल गया है मेरा गाँव ॥
बदल गया है मेरा गाँव ॥
बदल गया है मेरा गाँव ॥
दीपक गुप्ता :दीप :
सालीचोका साहित्य परिषद ॥

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