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बदल रहा है मेरा गाँव

Deepak gupta

Deepak gupta

कविता

March 8, 2017

॥बदल रहा है मेरा गाँव॥
नहीँ रही पनघट पर गोरी
नहीँ रही पीपल की छाँव
बदल रहा है मेरा गाँव ॥
रिश्ते नाते टूट रहे है ,
संबोधन सब छूट रहे है ,
कोई ना किसी के पड़ता पाँव ,
बदल रहा है………….
बऊ दद्दा की वो आशीशे
अम्मा के आँचल की छाँव
नहीँ मिले अब कही भी जाव ,
बदल रहा है…………….

हर कोई बस भाग रहा है ,
धन के पीछे भाग रहा है ,
धन न रुके कभी एकइ ठाव ,
बदल रहा है…………..
धन तो सबने कमा लिया है
दीप खुशी का बुझा लिया है
हर खुशी हुई अब हारा दाँव
बदल गया है मेरा गाँव ॥
बदल गया है मेरा गाँव ॥
बदल गया है मेरा गाँव ॥
दीपक गुप्ता :दीप :
सालीचोका साहित्य परिषद ॥

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Author
Deepak gupta

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