कविता · Reading time: 1 minute

बदल जायेगी तकदीर—– कविता

बदल जायेगी तकदीर

श्रम और आत्म विश्वास हैं ऐसे संकल्प

मंजिल पाने के लिये नहीं कोई और विकल्प

पौ फटने से पहले का घना अँधेरा

फिर लायेगा इक नया सवेरा

देखो निराशा मे आशा की तस्वीर

तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर

बस दुख मे कभी भी ना घबराना

जीवन के संघर्षों से ना डर जाना

युवा शक्ति पुँज बनो तुम कर्मभूमी के वीर

तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर

नयी सुबह लाने को सूरज को तपना पडता है

धरती कि प्यास बुझाने को बादल को फटना पडता है

मंजिल तक ले जाती है आशा की एक लकीर

तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर्

कुन्दन बनता है सोना जब भट्टी मे तपाया जाता है

चमक दिखाता हीरा जब पत्थर से घिसाया जाता है

श्रममार्ग के पथिक बनो अवरोधों से जा टकराओ

मंजिल पर पहुँचोगे अवश्य बस रुको नहीं बढते जाओ

बदल जायेगी तकदीर

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