बदलो चौकीदार को

……….बदलो चौकीदार को
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देखो चौकीदार को, चोरों के सरदार को
अच्छे दिन वो वांट रहा, देश के गद्दार को

फिर भी सबसे अच्छा है, खाली उसका बस्ता है
देश लूटाकर देखो वो , अब भी खुलकर हंसता है

ऐसे चौकीदार की , चोरों के सरदार की
नही जरूरत देश को, ऐसे पहरेदार की

छप्पन इंची सीना है, बातों में सब कहना है
देश के दुश्मन बोल रहे , मोदी दिन का गहना है

वो कहता मै जोगी हूँ, झोला उठा ले जाऊंगा
और माल्या,ललित,नीरव, के पास चला जाऊंगा

कोई हमें भी बतलादो, अच्छे दिनों की परिभाषा
जनता ये भूखी, नंगी, लगा बैठी थी कुछ आशा

नही मीडिया बोल रहा, सच की पर्ते नही खोल रहा
देश लूट रहा बारम्बार , चौकीदार आराम से सो रहा

ये अब तक एक डेमो था, अभी देखना क्या होगा
यदि यही चौकीदार रहा, जानें अभी क्या क्या होगा

गर देश बदलना चाहो तो, पहले चौकीदार बदलो
घर के और सरहद के, अब सारे पहरेदार बदलो

वर्ना देश है खतरे में , चौकीदार के लफडे में
माल्या,ललित,नीरव, सब रामदेव के हिस्से में

जागो देश वासियो , तोडो नींद बच जाओगे
वर्ना मोदी मोदी करते, भूखे प्यासे मर जाओगे

हमको तो इस चौकीदार की, नीयत खोटी लगती है
मजदूर, किसान,व्यापारी की, किस्मत लूटती दिखती है

मनमोहन और मोदी जी की, एक समीक्षा कर लेना
हो सके तो 2019 में , देश की रक्षा कर लेना

सपनों का भारत नही, हमें सच का भारत चाहिए
“सागर” चोरों से सरदारों से, देश सुरक्षा चाहिए !!
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मूल रचनाकार …..
डाँ. नरेश कुमार “सागर”
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