बदली जीवन रेखा है

बदली जीवन रेखा है
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जब से तुम्हें देखा है
बदली जीवन रेखा है

फिरते थे मारे – मारे
मायूस थे बिन तुम्हारे
हसीन ख्वाब देखा है
बदली जीवन रेखा है

राह थी जीने की सूनी
खुद से थी कहासूनी
राह में तुमको देखा है
बदली जीवन रेखा है

रातों को थे सुपने देखे
खूब लगते तेरे भुलेखे
सचमुच तुम्हें देखा है
बदली जीवन रेखा है

मेघों की गर्जन हुई है
कली फूल बन गई है
मयख्यारी से देखा है
बदली जीवन रेखा है

तुम रानी मैं तेरा राजा
बजाएंगे जीवन बाजा
प्रेम में मचलते देखा है
बदली जीवन रेखा है

झोली खुशियों से भरी
तुम बनी मेरी हूर परी
सुखविंद्र की है सुलेखा
बदली जीवन रेखा है
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन...
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