.
Skip to content

** बदलते रिश्ते … **

Neelam Ji

Neelam Ji

कविता

August 12, 2017

?????????
अपने तो हैं अपनापन नहीं ,
भाई तो है भाईचारा नहीं ।
रहा कोई किसी का सगा नहीं ,
रिश्ते तो हैं पर वफ़ा नहीं ।।

स्वार्थ से भरी इस दुनिया में ,
अपनों को अपनों से प्यार नहीं ।
खून के रिश्ते भी हुए पराए ,
रहा खून पर अब ऐतबार नहीं ।।

बदलते रिश्ते बदलते ढंग ,
जाने कब कौन दिखाए कैसा रंग ।
मतलब के रह गए सब रिश्ते हैं ,
चलते नहीं अपने अब मुश्किल में संग ।।

बात ख़ुशी की हो तो गैर भी साथ हो लेते हैं ,
आए जो संकट तो अपने भी मुँह मोड़ लेते हैं ।
भेद खुलता है अपने-पराये का मुश्किल में ही ,
जो संकट में छोड़ दें वो रिश्ते सिर्फ नाम के होते हैं ।।
????????????????

Author
Neelam Ji
मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।
Recommended Posts
इस रिश्ते का भविष्य क्या है?
नोएडा सेक्टर-27 में रविवार को डॉक्टर कपिल भाटी ने पिस्टल से खुद की कनपटी पर गोली मार ली डॉक्टर कपिल ने अपने सात पेज के... Read more
*इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* के साईड एफेक्ट  पर एक कहानी
*इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* जैसे अविष्कार ने आज कल जिस तरह एक व्यापार का रूप ले लिया है,जैसे कि कुछ लोग तो सही मे औलाद चाहते हैं... Read more
वक़्त अभी बाकी है
पल के साथ चलते हैं , पल गुजरते जाते हैं , खुद को पाने की बस , कोशिश करते रह जाते हैं। वक़्त के उस... Read more
माँ कैसी  हो तुम ?
कहानी माँ कैसी हो तुम ? आभा सक्सेना देहरादून कल ही मैं माँ को मेंन्टल हाॅस्पीटल में छोड़ कर आयी हूं उनको मेंटल हाॅस्पीटल में... Read more