Aug 1, 2016 · कविता
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बदलते चेहरे बदलते रिश्ते…

दिया था….
मांग कर जाने क्या गुनाह हो गया
अपनों में बुरे हो गये
अपनों के बदलते चेहरे देखकर
झूठे है वो रिश्ते जो निभते है
केवल देकर
बस केवल देकर…..

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज... View full profile
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