कविता · Reading time: 1 minute

बदलती सोच

बदल रही है सोच हमारी
नया नज़रिया आया है …
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
नारा सबने मिलकर लगाया है
रीति -रिवाज की बंदिश तोड़
उसे आगे बढ़ाया है
बदल रही है सोच हमारी ..
बहूअब बेटी बनेगी
बेटी घर की लक्ष्मी
जिसके आँचल में रहेगी
सुख -शांति और समृद्धि
बदल रही है सोच हमारी…
लेखिका -मीनू यादव

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मीनू यादव स्नातकोत्तर (हिंदी ) टी.जी. टी .(अध्यापिका ) मेरे लेख और कविताएँ कई अखबार , पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं l
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