बदलता मौसम

हर रोज बदलते मौसम में
बेचैन हवाएँ चलतीं हैं ।
तय करना कितना मुश्किल है !
किस ओर हवाएँ चलतीं हैं ।
राही कब कौन जतन कर ले ।
धूप तपे ,अभी बारिश भीजे ।
अगले पल का कोई ठौर नहीं ।
कल के बारे में क्या कोई बूझे ।

Like Comment 0
Views 126

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing