कविता · Reading time: 1 minute

बदरा तुम क्यों शीत काल में

बदरा क्यों तुम शीत काल में
अंबर के घर आये हो ।
कैसी कामना पूरी करने
बिन बुलाये ही छाये हो ।
शरद गुलाबी को देखकर
मंद मंद मुस्काये हो ।
या चिढ़ाकर फिर उसे तुम
हमे ही सताने आये हो ।

डॉ रीता

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