Jun 18, 2020 · कविता

बताओ आकाश

सुना था,
फलक सारे सितारों का घर है
चाहे,
कोई चटकीला हो
या मद्दम सितारा
चाहे,
वह झुंड मे झिलमिल बहती आकाशगंगा हो
या एकांकी ध्रुवतारा
या चाहे,
घुमक्कड़ सप्तऋषि-दल

सबको अपनी रोशनी
बिखेरने का हक़ है

हे आकाश! मुझे बताओ
फिर तुम्हारा कोई सितारा
टूटकर बिखर क्यों जाता है यकायक?
-निकीपुष्कर

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