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बडा ऊंचा समझते हो अपना कद नही देखा

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 12, 2017

बडा ऊंचा समझते है अपना कद नही देखा
पकड बडी ही कहते हो अपना जद नही देखा।
लगता है सरोवर को बडा हूं मै भी सागर से
मेढक है कुएं के जो गहरा नद नही देखा।
पर्वत है नाप लो ऊंचाइयां अपनी
पता चल जाएगा क्या हो अभी तक हद नही देखा।
बडो का साथ कर लो तुम कुछ सीख उनसे लो
पाप की गठरी से तौला है धर्म की आमद नही देखा।
बडी लडाइयां समझे हो मेरे और खुद के बीच
तनाव युद्ध का देखो भारत पाक सरहद नही देखा ।

विन्ध्यप्रकाश मिश्र

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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