कविता · Reading time: 1 minute

“बड़े दिनों बाद आए हो”

बड़े दिनों बाद आए हो,
साथ में क्या लाए हो,
बीते हुए कुछ पल ,
या ख्वाबों के गलीचे,
कुछ तो बताओ,
क्या सोच रहे हो,
देर तक बैठूंगी,
ख्वाबों के गलीचे पे,
कुछ सवाल पूछूंगी,
निहरूंगी तुम्हे और ,
बीते पल में खो जाऊंगी,
देखो आज चांदनी में,
भीगी हूं किस तरह,
स्याह जिंदगी धूल सी गयी है,
तुम दोगे ना आज मेरे,
सारे सवालों के जवाब,
बोलो मुक्त कर दोगे ना,
मुझे उलझनों के बंधन से,
बड़े दिनों बाद आए हो,
जाने नहीं दूंगी आज,
बहाने नहीं सुनूंगी,
आज इस गलीचे पर,
तुम भी बैठना मेरे साथ,
देखो! तुम्हारी छटा से,
धरा भी बेसुध हो रही है,
मुक्त होकर बंधनों में बंध रही है,
तुम फिर भी निष्ठुर हुए जा रहे हो,
चलते ही जा रहे हो,
आज तुम को रुकना होगा,
सवालों के जवाब देना होगा,
बड़े दिनों बाद आए हो,
ऐ चांद! ऐ चांद……

© डा० निधि श्रीवास्तव “सरोद”…

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