Nov 14, 2018 · कविता
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बच्चे मन के सच्चे “बाल दिवस कविता”

ये नन्हे मुन्ने बच्चे, कितने मन के होते सच्चे ।
तुतलाते हुए जब ये बोलें, मन को लगते अच्छे ।।

न जाने छल कपट ये, मन को मोह जाते हैं ।
अपने हों या गैर, ये सबसे घुल मिल जाते हैं ।।

चहकती चिड़ियों सा, मधुर संगीत सुनाते हैं ।
महकते फूलों सी, सदा खुशियाँ बिखराते हैं ।।

मासूम अदाओं से, सबका दिल बहलाते हैं ।
बच्चों के संग, बड़े भी बच्चे बन ही जाते हैं ।।

अपने बच्चों में हम, अपना बचपन पाते हैं ।
चलो बचपन की यादें, फिर से दोहराते हैं ।।

कोई आँगन रहे ना बच्चों के बिन, दुआ मनाते हैं ।
आओ मिलकर बच्चों के संग, बाल दिवस मनाते हैं ।।

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Neelam Chaudhary
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*Writer* & *Wellness Coach* ---------------------------------------------------- मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी... View full profile
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