बच्चे बड़े हो गए है

गूंजती थी जिनकी किलकारी इस घर में
चलना भी सीखा था जिसने इस घर में
अब घुटन होती है उनको इस घर में
लगता है बच्चे अब बड़े हो गए है

पकड़ कर चलते थे जो पापा का हाथ
नींद आती थी जिनको बस मां के साथ
अब उन्हें दोस्तों का साथ ही अच्छा लगता है
लगता है अब बच्चे बड़े हो गए है

लड़ते थे जो मां की गोद में बैठने के लिए
लगता था जिन्हें अंधेरे से डर
अब वो देर रात घर लौटने लगे है
लगता है अब बच्चे बड़े हो गए है

आती नहीं थी मां से कहानी
सुने बिना जिनको नींद
आज उनकी आवाज़ सुनने के लिए
मां के कान तरस रहे है
लगता है अब बच्चे बड़े हो गए है

जो मिट्टी में खेलकर भी करते थे मस्ती
मिलती थी जिनको खुशी बस चंद खिलौनों से
अब ये घर भी उन्हें छोटा लगने लगा है
लगता है अब बच्चे बड़े हो गए है

खेलते थे दिनभर जो बच्चे एक साथ
हर खुशी और ग़म बांटते थे जो मिलकर
अब अलग आशियाना ढूंढ रहे है
लगता है बच्चे बड़े हो गए है

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मैं एक कविता का विद्यार्थी हूं । सामान्य भाषा, जो आम लोगों को समझ आए,...
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