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बचपन स्वर्ग समान

देखो कितना प्यारा बचपन,
मस्ती उमंग में सब है मगन,
क्या धरा और क्या है गगन,
लोभ मोह से अति दूर मन,
उछल कूद करते हर क्षण,
खुद ही राजा लड़ते रण,
सबकी करते वो है नकल,
भोली सूरत पर तेज अक्ल,
प्रश्नों की करते जब बौछार,
बड़े भी मान लेते अपनी हार,
यह बचपन है स्वर्ग समान,
गाते हम सब सुंदर गान,
।।।जेपीएल।।

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जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...
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