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||बचपन की याद दिलाता है ||

Omendra Shukla

Omendra Shukla

कविता

January 14, 2017

“वो बचपन के भी क्या दिन थे
वो पापा की डांट,माँ की दुलार और दादी का प्यार
वो पीपल के वृक्षों पर गिद्धों का मंडराना
चहक-चहक चिड़ियों का गीत सुनाना
दूर-दूर तक फैले होते थे खेत-खलिहान
वो मिटटी की सोंधी महक
वो सरसों के फूलो पे मंडराती तितलिया,
वो ठण्ड के सुहाने मौसम में
जलते हुए पुआल की दहक
मन को बहुत लुभाती है
बचपन की याद दिलाती है ,
वो बड़े मकान आँगन वाले
वो अमरुद के वृक्षों की झुरमुट
हुड़दंग करते इन वृक्षों पर
वो चहचहाते तोतो का झुण्ड
वो प्राथमिक विद्यालय गाँव का
रोज जहां पढ़ने जाते थे
वो काली पटरी पे दूधिया स्याही,
वो घी से चुपड़ी रोटी खाने में
और हैंडपंप का ठंडा पानी
याद बहुत ही आता है
बचपन की याद दिलाता है ,
वो एटलस की साइकिल से घर आना
सहसा रस्ते में चैन उसकी उतर जाना
वो चैन चढ़ाते का काला हो जाना
पोंछ उसे शर्ट में अपने
घर वापस मेरा आ जाना ,
देख कालिख की धार शर्ट पर
माँ का सहज ही गुस्सा हो जाना
कान पकडके मुर्गा बनना
और माँ से क्षमा याचना करना ,
वो परियों के किस्से दादी के
वो माँ की मधुर लोरिया अब भी
कानों में गुजा करती है
याद बहुत ही आता है
बचपन की याद दिलाता है ||

Author
Omendra Shukla
नाम- ओमेन्द्र कुमार शुक्ल पिता का नाम - श्री सुरेश चन्द्र शुक्ल जन्म तिथि - १५/०७/१९८७ जन्मस्थान - जिला-भदोही ,उत्तर प्रदेश वर्तमान पता - मुंबई,महाराष्ट्र शिक्षा - इंटरमीडिएट तक की पढाई मैंने अपने गांव के ही इण्टर कॉलेज से पूर्ण... Read more
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