कविता · Reading time: 1 minute

बकरी की पीड़ा ( बकरीद पर विशेष )

खुशी तुम्हारी ,
और गम हमारे लिए क्यों ?

आनंद तुम्हारा ,
हमारे लिए मौत क्यों ?

अल्लाह तुम्हारा कुर्बानी मांगे ,
तो खुद की दो ,अपनी बदियों की दो ,
हमारी कुर्बानी क्यों ?

हमारा खून बहाकर तुम्हें ,
जन्नत नही मिलेगी ।
फिर यह जीव हत्या क्यों ?

जिस खुदा की तुम औलाद हो ,
हम भी उसी की संतान है ।
फिर तुमसे वो खुश होगा क्यों?

हमारे भी बच्चे है ,परिवार है ,
हमें मारने से पहले जरा उनके विषय में सोचो ।
अपने आप को हमारे स्थान पर रखकर ,
नहीं सोचते तुम क्यों ?

तुम्हारी तरह हमें भी जीने का हक है ।
ईश्वर का अंश यदि तुममें है तो हम में भी है ।
जिस धरती पर रहना चाहते हो तुम ,
एकाधिकार के साथ ।
उस धरती पर रहने का हक हमारा भी है ।

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