कविता · Reading time: 1 minute

बंधन

रक्षा का बंधन
बंधन अनोखा
शहद में भीगा
मीठा-मीठा
रसीले आम सा
जिसमें भरा है
जीवन रस
कितने सुहाने थे
बचपन के वो पल
गुजा़रे थे जो हमने
साथ साथ
छीना-झपटी, मारा-मारी
खेले-कूदे साथ-साथ
भाई सदा ही आगे चलता
और बहन की रक्षा करता
जब आए उस पर कोई विपदा
हाथ सदा माथे पर रखता
भाई-बहन का स्नेह निराला
कितना सच्चा ,कितना प्यारा ।

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