बंद लिफाफों में न करो कैद जिन्दगी को

बंद लिफाफों में न करो कैद जिन्दगी को

बंद लिफाफों में न करो कैद

जिन्दगी को

आसमां तुम्हारा है ,

उड़ान भरकर देखो

जीवन का उत्कर्ष , साहस , शक्ति ,

उमंग का एहसास

इसे व्यर्थ न गंवाओ तुम

सपने तुम्हारे अपने हैं ,

उड़ान भरकर देखो

जीवन का उत्कर्ष , चांदनी सी

शीतलता , वायु सा वेग और जल

सी निश्छलता

क्यों फिर रहे हो आवारा बादलों से

गगन विशाल है ,

उड़ान भरकर देखो

अनमोल होती है निंदिया , यूं ही

जाग – जाग रातें न बिताओ तुम

सपनों का गगन व्यापक है ,

उड़ान भरकर देखो

क्यों दुःख के उस पार , दुःख को

खोज रहे हो तुम

स्वयं के अंतर्मन को पंख दो ,

उड़ान भरकर देखो

अपने किरदार से परिचय क्यों नहीं

हो रहा तुम्हारा

स्वयं को सजाओ, संवारो ,

उड़ान भरकर देखो

तुम्हें अपनी मंजिल का क्यों हो

रहा भान नहीं

जीवन की सार्थकता , सत्कर्म से

परिपूर्ण आसमां में निहित है ,

उड़ान भरकर देखो

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने ,...
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