कविता · Reading time: 1 minute

बंटते हिन्दू बंटता देश

आतंकी थे वो सीम्मी के पुलिस ने जिनको मार गिराया ।
नींद उडी क्यों नेताओ की आज तलक ये समझ ना आया ॥
देश का बेटा रोज़ मर रहा आतंकी की ही गोली से ।
बोला नहीँ एक भी नेता इस बाबत अपनी टोली से ॥
आतंकी जब भी मरता है मुसलमान ही पाया जाता ।
संरक्षण और वोट की खातिर हिन्दू नेता शोर मचाता ॥
जातिवाद पर बाँट दिया था पहले भी यह हिंदुस्तान ।
नहीँ बाँटने देंगे फ़िर से हम अपना यह देश महान ॥
इस संसार में कई देश है मुसलमानों का देश कहलाते ।
किंतु केवल एक देश है हिन्दुओं की जाति के नाते ॥
नेताओं ने बांटे हिन्दू अलग अलग पार्टिया बनाई ।
पंडित यादव हरिजन कह कर हिन्दू दल में आग लगाई ॥
जातिवाद का ज़हर पिलाकर आतंकी को पाल रहा है ।
एक हो गया जिस दिन हिन्दू देखेगा आतंकी भाग रहा है ॥

जागो जागो हिन्दू जागो

विजय बिज़नोरी

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