फेसबुक की दुनिया

कितनी अजब है
फेसबुक की दुनिया
बहुत से अनजान लोग मिलते हैं
और जुड़ जाता है एक अनोखा बंधन
पनपते हैं अनजान से अनाम रिश्ते
एक होता है लाइक बटन
रिश्तों की शुरुआत का बटन
जो धीरे धीरे कमेंट में बदलता है
और यहीं से शुरू होता है
अनाम रिश्तों का नामकरण
और शेयर तक जाता है
पता ही नहीं चलता
कब चैट बॉक्स में चला आता है
खूबसूरत से रिश्तों का एहसास
आभासी दुनिया के ये रिश्ते
अपनों का सा एहसास देते हैं
हर ख़ुशी और गम शेयर करते हैं
हमारी हर उपलब्धि पर खुश होते हैं
हर नाकामी में हौंसला देते हैं
कितनी खुशनुमा है
फेसबुक की दुनिया
कितना अच्छा लगता है
जब मिल जाता है
कोई बिछड़ा यार अपना
कितनी ख़ुशी मिलती है
दिख जाता जब कोई चेहरा
जिसके संग खेले बचपन में
अजीब रोमांच सा भर जाता है
जब मिलता है प्राइमरी का दोस्त
बांछे ही खिल जाती हैं
जब मिल जाता है
बचपन का मासूम सा प्यार
वो पहला पहला आकर्षण
यूँ ही प्रोफाइल देखते देखते
अगर दिख जाती है
एक सूरत प्यारी सी
जिसको देखने को तरसते थे
और कभी कह ही न पाये
अपने दिल की बात

सच में अनोखी है ये दुनिया
खूबसूरत है फेसबुक की दुनिया

“सन्दीप कुमार”

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3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना"... View full profile
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