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” ———————————————- फूल मुस्कराते हैं ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गज़ल/गीतिका

October 2, 2017

आंखों में तुम हो बसे , रंग नये भाते हैं !
पलकों में सजते सपन , और मुस्कराते हैं !!

औरों से हम चाहें ,दोष ना गिने कोई !
अपने ही अक्सर यहां , उंगलियां उठाते हैं !!

हंसना ही जीवन है , हैं आतप सदा संगी !
काँटे हो बैरी भले , फूल मुस्कराते हैं !!

राजनीति घटिया हुई , विदूषक से नेता हुए !
देशहित नहीं प्यारा , हमें बांटें जाते हैं !!

खौफज़दा है सब यहां , साये हैं आतंकी !
आड़ धर्म की लेकर , सबको छकाते हैं !!

वक़्त की मेहरबानियां , रंग यों दिखाती हैं !
मिलते रहे जो गले , नज़र ना मिलाते हैं !!

हिंदुस्तान है ये मेरा , कैसी ये त्रासद है !
हिन्दू हैं कहना गलत , सेक्युलर कहलाते हैं !!

बृज व्यास

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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