फूल, पत्ते जो डाली लगे

फूल-पत्ते जो डाली लगे ।
ठंड उनको भी भारी लगे ।।

ग़र सच्ची जो अरज़ी लगे ।
समझो उसकी ही मरज़ी लगे ।।

कोई कंबल उड़ा दो इन्हें ।
बाहरी न बीमारी लगे ।।

मुआफ़ी से जोड़ा बहुत ।
ज़िन्दग़ी फिर भी टूटी लगे ।।

आदमी में नहीं आदमी ।
बात उसकी न अच्छी लगे ।।

पानी मिलता बहुत है यहाँ ।
रूह लेकिन ये प्यासी लगे ।।

मुस्कुराती हैं जो सूरतें ।
आँख उनकी भी रोती लगे ।।

सजाया जिसे शौक से ।
च़ीज वो ही तो बिखरी लगे ।।

छोड़ दो ये ग़ुम़ाँ ” ईश्वर” ।
शायरी तेरी अच्छी लगे ।।

.. – ईश्वर दयाल गोस्वामी ।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 213

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share