मुक्तक · Reading time: 1 minute

फूलों से जरा बचकर रहना

मिल जाते हैं रहम परायों के,
अपनों से जरा बचकर रहना
भर जाते हैं जख्म पत्थरों के
फूलों से जरा बचकर रहना
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कपिल कुमार
31/07/2016

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