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फूलों में बारूद

Mudassir Bhat

Mudassir Bhat

कविता

December 25, 2016

तुम्हे शोभा नहीं देता
कि तुम आंसों बहाओ
आँखें फोड़कर
तुमने बेच दी नदी चील को
और मगरमच्छ को चिनार
तीक्ष्ण चोंच और पैनी नज़र में
मछलियों ने सीख लिया है
मेंडक बनना
जबड़ों में आ गया है सम्पुर्ण आकाश.

तुम्हे शोभा नहीं देता
कि तुम शांत रहो
अशांति फैलाकर
तुमने संगीत में भर दी है
गोलियों की धुन
और कानों में खनक रहे है
विस्फोट के गीत,
सुर में सजा दिया है
माँ का करुण रूदन.

तुम्हे शोभा नहीं देता
कि तुम सुर्खियाँ बटरो
हत्याकांड कर
तुमने शवों को बनाया खाद
और लहू को पानी
उपज आये है ऐसे पेड़
जिनकी टहनियों में गाड़ा लहू है
और फूलों में बारूद
फल में पत्थर और
बीज में विस्फोट.

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Author
Mudassir Bhat
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर से, धरती के उस हिस्से से जिसे स्वर्ग कहा जाता है. इसी स्वर्ग की वास्तविकता को दर्शाने के लिए "स्वर्ग विराग" काव्य-संग्रह की रचना हुई है, जो चंद्रलोक प्रकाशन कानपुर के प्रकाशित हुआ है. कब से ढूंढ रहा... Read more

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