Jul 17, 2017 · कविता

फूलों की बगिया

मदहोश दिवाना हुआ भंवर,अलि मधुकर है बवराया
देख कोंपले​ बगिया में षटपद भृंगी होमंत्रमुग्ध भरमाया।

भूला पुष्प सहेजें शूल,रहा कलियों पर भ्रमर वो झूल,
खूब खिले सुमन कुसुम मंजरी रंग बिरंगे सुगंधित फूल।

भूलें प्रसून सूरजमुखी चमेली दिनकर की गर्मी को
कनेर सदाबहार के फूलों​ने भी रखा बरकरार नर्मी को।

मेघ निभाते बेजोड़ मित्रता, जब जब जल वो बरसाते
तब तब धरती पर रंग-बिरंगे प्यारे फूल सुमन खिल जाते।

सभी फूल हंसते हैं बाग में जैसे बचपन अबोध निश्छल
चमेली,गुलाब,कमल कुमुदिनी कुमुद गेंदा और गुढ़ल।

चम्पा​ कामलता चांदनी,नीलकमल कुमुद व नाग चम्पा
छूईमूई ,कली, कोंपल गुल मेहँदी की अनूप अनुकंपा।

गुलदाउदी लता गुलबहार पारिजात देवदार, सनोबर
माधवी पुष्प कली, कोंपल खिलाती मुस्कान अधरोंपर।

फूल मोतिया,नर्गिस केतकी भरते पिया हृदय उन्माद
खसखस,अफ़ीम,कामिनी परस्पर करत प्रेम संवाद।

नागफनी,धतूरा,पारिजात देते अद्भुत से संदेश
सन, पटसन छत्रक,सनोबर से सराबोर परिवेश।

लगा बगीचे में ये सुगंधित फूल,जीवन में भरे खुशियां
औषधीय गुणों से भरपूर है, भांति-भांति की कलियां।

वृक्ष,पौधों फूलों में होती रोग को दूर करने की क्षमता कभी कहीं वास्तुदोष मिटाने में भी सुमन है रमता।

तरह-तरह के गुलाब मतवाले विविधता में एकता कहते
चटख रंगों में मुस्काते रहते काँटों की दुनिया सहते ।

कीचड़ में रहके पद्म सद्चरित्र का संदेशा हमें सुनाते
मुसकाने मुरझाने के क्रम में जीवन किस्सा गुनगुनाते।

सीख ग्रहण कर इनसे नीलम,ले संकल्प मन में
दुख, विपदा आंधी तूफान में भी खुश रहो जीवन में।

नीलम शर्मा

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