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फिल्मों वाले अपराधी !

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

मुक्तक

December 7, 2016

फुटपाथों पर सोने वाले, आज खून के आंसू रोते,
समझ गये हैं फिल्मों वाले, नही कभी अपराधी होते,
समझ गये हैं पैसे वालों, का रुतबा अब भी कायम हैं
आम आदमी घिसता पिटता, बूढ़ा सा बेबस-बेदम हैं !

– नीरज चौहान

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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