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फिर से

जीऊँगी जिंदगी को फिर से
अब नई उमंग तरंग में फिर से
लिए अपनी तमन्नाओं को फिर से
अपने संग जिऊंगी में फिर से….

थाम हाथ में तममन्नो को फिर से
खिलखिलाऊँगी मस्त हो फिर से
नए सफर नई उम्मीदों को फिर से
रौशनी सी जगमगाऊँगी फिर से…

ज़िन्दगी के पांच दशक यूँ ही फिर से
बीत गए तो क्या हुआ जिऊंगी फिर से
बचपने को करीब से जिऊंगी फिर से
जिऊंगी अपनी जिंदगी फिर से…

मैं अपना नसीब बनाऊँगी फिर से
मस्त हो जिऊंगी जिंदगी फिर से
कोई साथ हो न हो सोचु न फिर से
जिंदगी खुशी खुशी बिताऊगी फिर से…

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355 Posts · 14.3k Views
पुस्तकालयाध्यक्ष ग़ाज़ियाबाद में पिछले 22 वर्षों से पब्लिक स्कूल में कार्यरत। लेखन- साहित्य रचना एवं अनेक समाचार पत्रों में लेख,कविताएं प्रकाशित कृतियां- 1-काव्यमंजूषा 2-मातृशक्ति 3-शब्दोत्सव 4-महापुरुष 5-काव्य शब्दलहर 6-अम्बेडकर जीवन…
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