फिर से इक नव वर्ष मिला है

फिर से इक नव वर्ष मिला है
॰॰॰
फिर से इक नव वर्ष मिला है
मानव मन को हर्ष मिला है
और इसे आगे ले जायेँ
अबतक जो उत्कर्ष मिला है

संशय के बादल हैँ माना
सफ़र बहुत लगता अनजाना
फिर भी हर्ष मना लो भाई
कल क्या होगा किसने जाना

साल नया ये गीत नया है
सबकुछ मेरे मीत नया है
कष्ट भरे दिन याद करेँ क्योँ
खुशियोँ का संगीत नया है

बहुत सहे इस दिल पर छूरे
हैँ अपने कुछ स्वप्न अधूरे
दिल की आशा बोल रही है
हो सकते हैँ शायद पूरे

– आकाश महेशपुरी

2 Likes · 285 Views
संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त...
You may also like: