.
Skip to content

फिर सात दोहे ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रकमिश सुल्तानपुरी

दोहे

March 8, 2017

बुधवार स्वतन्त्र दोहे —

—————-फिर सात दोहे—————

फूक फूक चलना सदा,, भूल एक पर्याप्त ।।
राम मॄत्यु का कटघरा, चौतरफा है व्याप्त ।।

विनय नम्रता सादगी ,सत्य सरस व्यवहार ।
सदाचार सदभाव का,,,, ऋणी रहा संसार ।।

मन की खायीं विषभरी, झांझर झरती बूंद ।
निज तन भींगे दुख सहे, तड़पे आँखे मूँद ।।

धन्य वही नर नागरिक, ज्ञानी या मतिमन्द ।
देख पड़ोसी की ख़ुशी , मिले जिसे आनंद ।।

सुख के दो दिन बाद में, दुख का है परिवेश ।
पुनः सुखों की चाह में ,,,,,,देह रह गयी शेष ।।

एक अवस्था वृद्ध की,,,माया बढ़ती जात ।
मायारूपी मृत्यु के , सम्मुख है भय खात ।।

घाव मिले यदि शत्रु से , छोड़ सभी अपवाद ।
बदला है तो लीजिये,,,,चाहे दो दिन के बाद ।।

©©राम केश मिश्र

Author
रकमिश सुल्तानपुरी
रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं ।... Read more
Recommended Posts
दोहे की दो पंक्तियाँ
दोहे की दो पंक्तियाँ, .रखतीं हैं वह भाव । हो जाए पढ कर जिसे,पत्थर मे भी घाव!! दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार! फीकी... Read more
प्रीत पर दोहे
दोहे 1 हमने अपनी प्रीत पर ,लिखे यहाँ जो गीत सात सुरों में बाँध खुद , झूम गया संगीत 2 बादल पर लिख दे घटा... Read more
दोहे
दिल सम्हाल कर राखिए,ना जाये यह टूट। दिल बिन प्रेम में ना उपजै,प्रेम बिन सब सून॥ तन मन बाबरौ भयो,देख तेरी सरलताई। आगे आगे क्या... Read more
वो तीन दोहे।
वो तीन दोहे-- रहे सजगता कर्म में ,,,,,भाव रहे निष्काम ।। रिस्तो में खुशियाँ रहे, जीवन के आयाम ।। लोभ क्षोभ मद मोह को,,, करने... Read more