फिर मिलेंगे

आऊंगा फिर कभी तेरी ओर
अपने साथ लेके एक नई पहचान
अभी चलता हूं फिर मिलेंगें
कुछ है साथ यादों का समंदर
कुछ यादों की नदियां छोड़ जाता हूं
कभी तो कहीं तो नदियां समंदर से
फिर मिलेंगे
अच्छा चलता हूं फिर मिलेंगे
वक़्त जो गुजारे थे साथ थोड़ा रख लेता हूं
चंद बातों को भी रख लेता हूं
महसूस होगा कभी अकेलापन तो
इन्हें याद कर लूँगा
ये लम्हे फिर कहाँ मिलेंगे
चलो चलता हूं फिर मिलेंगे
मुसाफिर हु राह चलने की आदत है
चलते चलते फिर कभी आऊंगा तेरे शहर की ओर
कभी तो किसी चौराहे से तेरे शहर के रास्ते
फिर मिलेंगे
अब चलता हूं फिर मिलेंगे

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