फिर भी सूरज निकलता है

हल्का सा धुंध
धरती की छाती पर सवार
सूरज को रोकने की पूरी तैयारी
फिर भी सूरज निकलता है ,
गोल ,लाल ,सुंदर ,दिव्य
धुंध को चिरता हुआ
देता है अपना प्रकाश
कर देता है निहाल सबको
अपनी अनवरत ऊर्जा से ,
पता नहीं चलता है रात कब गुजरी
इसका एहसास भी सूरज कराता है
और दौड़ने लगता है
युवाओं में क्रान्ति का गर्म खून
और शुरू हो जाता है एक अनवरत संघर्ष
मूल्यों के लिए ,जिनका आज ह्रास हो रहा है
और यह संघर्ष जारी रहेगा
चिंगारियां मिलकर आग बनेंगी
राख कर देंगी उन मंसूबों को
जो कर रहे मूल्यों के साथ छेड़ छाड़
जीने के अधिकार के साथ
इसे याद रखना
वर्तमान के महल का सपना
भविष्य गढ़ेगा
इतिहास करेगा नींव प्रदान
तब पहिया आगे बढेगा .

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मैं रचनाकार हूँ ,मुझे कई काव्य पुस्तकें प्रकाशित करने का सौभाग्य मिला है ,मुझे किसी...
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