Skip to content

फिर उसे मेरी याद आ रही होगी – कुमार विश्वास

MridulC Srivastava

MridulC Srivastava

कविता

October 26, 2016

आप आये या बाहर आई नव जीवन नई चाँदनी साथ लाई,तोड़ ही चुके थे इस रंग से नाता,नई चमक,नव अनुभव साथ लाई
फिर उसे मेरी याद आ रही होगी
फिर वो दीपक बुझा रही होगी
आकर फेसबुक पर मेरे, आ कर फेसबुक पर मेरे,
हर पोस्ट में खुद को तलाश रही होगी
चूम कर अपने बेटे का माथा,चूम कर अपने बेटे का माथा
वो मुझ को ही टीका लगा रही होगी…
फिर उसे मेरी याद आ रही होगी,फिर कही वो दीपक बुझा रही होगी,फिर कही वो दीपक बुझा रही होगी
जब कभी भी छुआ होगा उसने उसे
ये बात खुद से ही छुपा रही होगी,फिर आज उसे मेरी याद आ रही होगी.
आंखियो के झरोखों से फिर देखो जो,
पूरी कायनात मुझे तुमसे ही मिला रही होगी
फिर उसे मेरी ही याद आ रही होगी,
?फिर कहीं वो दीपक बुझा रही होगी?

कुमार विश्वास + सम चेंजेज मेड इन माय फेवर

Share this:
Author
MridulC Srivastava
हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे, इस माटी का कोई मोल नहीं

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you