गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

फिर इन्कलाब कब आएगा

ये घपले घोटाले रिश्वतखोरी का चलन कब जाएगा
कब जागेंगे हम देश में फिर इन्कलाब कब आएगा

कब सुरक्षित और भयमुक्त होंगी देश में नारियां
कौन उठाएगा यह बीड़ा यह परिवर्तन कब आएगा

कब मिटेगी देश से गरीबी भुखमरी और बेरोज़गारी
कब बनेंगे आत्मनिर्भर विकास का परचम कब लहराएगा

कब खत्म होंगे जाति धर्म और समुदायों के मतभेद
ये ऊंच नीच और अमीर गरीब का भेदभाव कब मिट पाएगा

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