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फिर आओ गिरधारी

Rajeev 'Prakhar'

Rajeev 'Prakhar'

मुक्तक

November 6, 2016

घोर तमस छाया है देखो,
पाप-ताप लाचारी का l
चहुँ ओर है झंडा ऊँचा,
लोभी-अत्याचारी का l

आहत है जग, मानवता का,
एक नया युग लाने को l
फिर से रस्ता देख रहा है,
गोवर्धन-गिरधारी का l

– राजीव ‘प्रखर’
मुरादाबाद (उ.प्र.)
मो. : 8941912642

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Author
Rajeev 'Prakhar'
I am Rajeev 'Prakhar' active in the field of Kavita.

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