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फासला भी हुआ है

ashok ashq

ashok ashq

गज़ल/गीतिका

March 20, 2017

अदावत हुई फासला भी हुआ है
वफ़ा का अभी सिलसिला चल रहा है

कहें हाल कैसे खुदाया बता दे
मुहब्बत यहाँ कब मुकम्मल हुआ है

उतर जो गया इश्क़ के ही भँवर में
भला फिर उसे भी किनारा मिला है

जमाना जिसे उम्र भर है सताया
वही नाम अपना फलक पर लिखा है

अगर रोकना है मिरी साँस रोको
दिवाना तिरा दर तुम्हारे खड़ा है

अगर हो इजाजत चलूँ यार घर को
मिरी माँ को बस इक मिरा आसरा है

न नफरत किसी से मुहब्बत सभी से
रकीबों सा फिर भी जमाना हुआ है

न देना नसीहत कभी ‘अश्क़’ मुझको
वफ़ा पर मिरी तो ख़ुदा भी झुका है

– ‘अश्क़’

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Author
ashok ashq

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