फाग गीत

आओ मिलकर गाएं फाग ।
छेड़ें समरसता का राग । ।

हुए बहुत दिन लड़ते-लड़ते ,
बात-बात पर खूब झगड़ते ।
लेकिन बात बनी न अब तक,
फिर क्यों ? हम झगड़े में पड़ते ।
अगर प्यार से मिल बैठें तो ,
खिल जाएगा जीवन – बाग ।।

बदला लेकर नहीं निकलता ,
किसी समस्या का कोई हल ।
कलुषित हो जाता है जीवन ,
पीड़ित हो जाता है पल-पल ।
रोटी में भी स्वाद न रहता ,
खट्टी लगती मीठी साग ।।

छद्म प्रशंसा , अहंकार में ,
हुआ नर्क ये पूरा जीवन ।
मन सबके उखड़े-उखड़े हैं ,
मिलते रहते हैं केवल तन ।
दफ़्न हुआ संगीत आजकल ,
शोर छेड़ता गंदे राग ।।

आओ मिलकर गाएं फाग ,
छेड़ें समरसता का राग ।।

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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02...
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