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फागुन

Rajni Ramdev

Rajni Ramdev

घनाक्षरी

March 3, 2017

हाथन भरे हैं रँग, …….सखियन के हैं सँग
फागुन को हुड़दंग,……….होली खेलन लगे
भर पिचकारी मारी, भिगो दीन्ही मोरी सारी
बात तो मानो हमारी, ……..काहे ठेलन लगे
उड़ रहो है गुलाल, …..आसमान हुआ लाल
फैलावत कान्हा जाल, …सखी पकडन लगे
शिकायत करें सखीं, …जसुदा के बात रखी
लाला तेरा करे दुखी,……फिर अकड़न लगे
#रजनी

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Author
Rajni Ramdev
रजनी रामदेव जन्मस्थान कानपुर बी एस सी (मैथ्स) पति--एस एन रामदेव शौक--गद्य , पद्य लेखन,गायन और साहित्य पठन कुछ फेसबुक के साहित्यिक ग्रुप्स में सम्मान तथा कुछ रचनाएँ प्रकाशित