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“फ़ितरत”

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

कविता

May 29, 2017

“फ़ितरत”
गिरगिट से रंग बदलती
मुहब्बत को गैर के साथ
देख कर
आँखों से बहता
सैलाब कहने लगा–
“आज भीगे मेरे ख़त के
कुँआरे अल्फ़ाजों को
नहीं पढ़ पाओगे,
हाँ.. मुहब्बत की कश्ती
बनाकर देखना
शायद कहीं कोई
नया साहिल मिल जाए।”
डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी (मो. 9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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